Shaily Bhagwat

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दुल्हन का प्रश्न

दुल्हन का प्रश्न 


आज विवाह की शुभ बेला में

सजधज कर वो तैयार खड़ी,
कल आंगन में खेलती बेटी
एकदम से हो गयी है बड़ी।


शादी का जोड़ा पहन कर
सोलह श्रृंगार कर सजी है,
आज दुल्हन का भेष धर
सुन्दर सजीली दमकी है।


मंडप सजे शहनाई बजे
स्वागत को तैयार घराती,
बैंड बाजे की धमक घोड़ी
चढ़े दूल्हा और नाचे बराती।


मेंहदी रचे कँगना चूड़ी सजे
हाथों में थामे सुंदर वरमाला,
सकुचाती घबराती पल पल
लागे जैसे शरमाये मधु बाला।


मातपिता हर्षित हो रहे बेटी
का देखकर ये सुन्दर अवतार,
नीर बहे नयनों से निरन्तर
डोली सजी देख अपने द्वार।


अपनों से मीलों दूर अब वो
चल देती पिया का हाथ थाम,
बोझिल क़दमों में उत्साह भर
चली ढूढ़ने नया घर नया नाम।


दिल में लाखों अरमान लिए
सजाये एक प्यार का झरोखा,
गृहप्रवेश पर स्तब्ध हुई देख
लालच का अनुबंध अनोखा।


सोचे मुझको दुल्हन बनाने को
माँ बाप ने जीतोड़ कार्य किया,
अपने सपनों को तिलांजलि दे
शादी का स्वप्न साकार किया।


प्रतिदिन अत्याचार सह लूँगी
पर मायके वापस न जाउंगी,
देह से आत्मा तक भले हो छलनी
संस्कारी बहू ही मैं कहलाऊंगी।


जिस पवित्र अग्नि को साक्षी
मान मुझे दुल्हन बनाया जाता,
दहेज़लोभी सौदागरों द्वारा मुझे
उसमें ही क्यों जलाया जाता।


आत्मदाह को उसी अग्नि में समाती
युगों से मैं क्यों रही ताड़न की अधिकारी,
समाज क्या देगा जबाव इसी ने सिखाया
जिस घर डोली जाये वहाँ ही निभाना
बस.......दुल्हन का रूप धर
उस घर से वापस अर्थी पर ही जाना।


#प्रतियोगिता हेतु 

स्वरचित
शैली भागवत "आस"✍️


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11 Comments

Zakirhusain Abbas Chougule

16-Jun-2022 02:30 PM

Nice

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Seema Priyadarshini sahay

12-Jun-2022 05:54 PM

बेहतरीन

Reply

Gunjan Kamal

12-Jun-2022 10:42 AM

शानदार प्रस्तुति 👌

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